पर्यावरण संरक्षण के लिए सकारात्मक पहल, 'हाँ' कहें और संरक्षण में सहभागी बनें" - माननीय उच्च न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई जी
इंदौर- सृष्टि सेवा संकल्प, जिला इंदौर इकाई द्वारा 14 सितम्बर 2025 रविवार, सायं 4 बजे, “माता भूमि पुत्रोहम पृथ्वीया" विषय पर “प्रबुद्धजन संगोष्ठी” का आयोजन अभिनव कला समाज, गांधी हॉल, इंदौर में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा वृक्षपूजन, गुरु अथर्ववेद पूजन व दीप प्रज्वलन कर गुरु अथर्ववेद की वंदना के साथ किया गया एवं कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय उच्च न्यायमूर्ति माननीय जय कुमार पिल्लई जी,
मुख्यवक्ता के रूप में श्री अंशुमान सिंह जी, वरिष्ठ अधिवक्ता(जबलपुर उच्च न्यायालय) एवं राष्ट्रीय संरक्षक सृष्टि सेवा संकल्प उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर डॉ राकेश जी सिघई, माननीय कुलगुरु DAVV इंदौर, श्री धीरज जी सहाय, उद्योगपति एवं जिला वृक्षाचार्य श्री मनीष जी पांडे का सानिध्य प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का संचालन कोपल जी सोनी, राधिका जी मालवीय एवं दिव्या जी राठौर ने, वृक्ष गीत वीर जी राजावत, राहुल जी जैन और मीत जी राजावत ने, संगठन की प्रस्तावना श्री विपिन जी राठौड़ व आभार राजवीर जी धाकड़ ने प्रकट किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए श्री विपिन जी राठौर ने बताया कि इंदौर जिला इकाई पर्यावरण के क्षेत्र में जन जागरण को लेकर विगत 3 वर्षों से कार्य कर रही है। जिसमें कुछ उल्लेखनीय कार्यक्रम है- स्कूलों में बीजारोपण संस्कार कार्यक्रम, ग्रीष्म ऋतु में आम के आम गुठलियों के दाम कार्यक्रम, पर्यावरण संगोष्ठी, रामलला बीजारोपण कार्यक्रम, वृक्षारोपण, प्रशिक्षण वर्ग, शीत शिविर, पर्यावरण संरक्षण पर प्रदर्शनी, पितरों को तर्पण-वृक्षारोपण अभियान, वृक्ष दीपावली व वृक्ष रक्षाबंधन जैसे वृक्षउत्सव, परिवार मिलन, वन संचार कार्यक्रम, वृक्षारोपण व श्रम साधना, पहलगाम में हुए शहीदों की स्मृति सिंदूर पथ का निर्माण, अखिल भारतीय चिंतन बैठक का आयोजन इस वर्ष इंदौर ने किया, पर्यावरण संरक्षण को लेकर जन जागरण रैली आदि कार्य कर रहे हैं। और वर्तमान में इंदौर जिलें में 15 से अधिक साप्ताहिक “वृक्ष समूह” गतिविधि( अवधि 90 मिनिट) संचालित हो रही है।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता श्री अंशुमान सिंह जी ने बताया कि ये वह धरती है, जहाँ जागने के बाद सबसे पहले पृथ्वी को प्रणाम करते है। ये भारतीय दर्शन है। ये मूल भाव है और इस भाव को जागृत करने की आवश्यकता है। हमारे ऋषियों ने बताया हमारा प्रकृति के साथ माँ का संबंध है( माता भूमि पुत्रोहम पृथ्वीया)।

हम पृथ्वी के पुत्र है पृथ्वी हमारी माता है इसलिए हम अपने घर के आंगे आटे की रंगोली डालते है। जिससे कीट/पतंगी/चीटी आदि भी अपना पेट भर सके। ये भारतीय संस्कृति का मूल भाव है।
भारतमाता की जय का सही अर्थ यही है कि हम पृथ्वी को माता मानते हैं, हमें धरती से भावनात्मक रूप से जुड़ना होगा, यह तभी संभव है जब हम सादगीपूर्ण और स्थानीय जीवन शैली अपनाएं, शोषक नहीं संरक्षक बने, उपभोगी नहीं उपासक बनेंगे। स्वर्णयुग लाना है तो हमें समाज की सोच बदलना होगी। और हमें प्रकृति की क्षति को व्यक्तिगत क्षति मानना होगी।
जिसने अथर्ववेद को ईमानदारी से पढ़ा तो वह समझ जाएगा कि भारत में प्रकृति का स्थान क्या है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय उच्च न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सकारात्मक पहल, 'हाँ' कहें और संरक्षण में सहभागी बनें। किसी भी संगठन से जुड़ने से पूर्व उसके विचारों को जानना चाहिए, मानव को अपने विचारों में सकारात्मता लानी होगी।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ राकेश जी सिघई, माननीय कुलगुरु, DAVV इंदौर ने बताया कि वेदों के अनुसार जीवन पद्धति जीने से नर से नारायण बनते हैं, जैसे विचार होंगे वैसा जीवन होगा। एक अकेला चना एक अकेला व्यक्ति भी बहुत कुछ कर सकता है। पूजन सामग्री को हम पूज्य नदियों में न बहायें, मंदिर जाएँ तो 1-2 पुष्प ही साथ चढ़ायें(प्रकृति को बचाने की भावना से), सब्जी लेने के लिए कपड़े का झोला लेकर जाए और त्योहारों पर मिट्टी की मूर्ति ही स्थापित करें।

अतिथि परिचय डॉ मनीष जी गुप्ता ने कराया। अतिथियों का स्वागत श्री मनीष जी पांडे, श्री संजय जी झांझरिया, श्री प्रदीप जी अग्रवाल, श्री विपिन जी राठौर ने किया। पर्यावरण के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य करने वाली संस्था देवास ग्रीन आर्मी का अभिनन्दन किया गया।
कार्यक्रम में सृष्टि सेवा संकल्प के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री प्रशांत जी गुप्ता, प्रदेश व्यवस्था प्रमुख श्री आशीष जी ठाकुर एवं प्रदेश प्रचार प्रमुख श्री विपिन जी सुगंधी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सामूहिक पर्यावरण संरक्षण का एक संकल्प भी लिया- त्यागपूर्वक उपभोग ही प्रकृति संरक्षण का उपाय है।
इसलिए “मैं संकल्प लेती/लेता हूँ कि पानी, प्लास्टिक, ईंधन, बिजली और कपड़ों का विवेकपूर्ण उपयोग करूँगी/करूँगा और इन संसाधनों के उपयोग में कटौती करके प्रकृति संरक्षण में योगदान करूँगी/करूँगा।”
कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थायें देवेन्द्र जी ब्रह्मभट्ट, नीरज जी गुप्ता, चेतन जी खंडेलवाल, अक्षत जी मेहरा, अंकित जी साकेत, अथर्व जी अर्ज़रे, प्रवीण जी गुप्ता, मनीष जी गर्ग, लोकेंद्र जी दुबे आदि सृष्टिसेवकों ने सम्भाली।
उपरोक्त जानकारी जिला प्रचार प्रमुख श्री संजय जी झांझरिया ने दी।
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