खुशखबरी! बैंक घटा सकते हैं प्रोसेसिंग शुल्क, लेकिन त्योहारों में खर्च बढ़ सकता है
व्यापार: त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए आरबीआई ने बैंकों को डेबिट कार्ड जैसे चुनिंदा खुदरा उत्पादों पर शुल्क घटाने को कहा है। सोमवार से जीएसटी सुधारों के लागू होने के साथ ही अगर बैंक शुल्कों में कटौती करते हैं, तो इससे मांग और खपत में अच्छी तेजी आ सकती है। इससे लोग ज्यादा पैसे खर्च करेंगे।
बैंकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो उन्हें शुल्क के रूप में मिलने वाले अरबों रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है आरबीआई ने जिन खुदरा उत्पादों के शुल्क में कमी करने की बात कही है, उनमें प्रमुख रूप से डेबिट कार्ड, न्यूनतम बैलेंस और देर से भुगतान पर लगने वाले शुल्क शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया, भारतीय बैंक संघ भी बैंकों के साथ 100 से अधिक खुदरा उत्पादों के शुल्क को घटाने की बातचीत कर रहा है। इन पर आरबीआई की नजर हो सकती है। एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग चुकाई जाने वाली फीस में भारी अंतर ने भी केंद्रीय बैंक का ध्यान आकर्षित किया है। केंद्रीय बैंक उन शुल्कों के प्रति विशेष रूप से सचेत है, जो देश में कम आय वाले ग्राहकों पर असमान रूप से प्रभाव डालते हैं। आरबीआई ने खुदरा उत्पादों पर शुल्क की कोई विशेष सीमा निर्धारित नहीं की है। इसे बैंकों पर छोड़ दिया है।
शुल्क वसूली की कोई सीमा तय नहीं
शुल्क वसूलने के मामले में बैंकों के लिए कोई अनिवार्य सीमा तय नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, खुदरा और छोटे व्यवसाय ऋणों के लिए प्रसंस्करण शुल्क आमतौर पर 0.5 से 2.5 फीसदी तक होता है। कुछ बैंकों ने होम लोन शुल्क की सीमा 25,000 रुपये तक सीमित कर दी है। ऋणों के धीमी वृद्धि के दौर के बाद भारतीय बैंकों की शुल्क आय में इस वित्त वर्ष में सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में विभिन्न उत्पादों पर बैंकों ने 510 अरब रुपये की कमाई है। यह रकम सालाना आधार पर 12 फीसदी अधिक है। हालांकि, मार्च तिमाही में यह सिर्फ छह फीसदी बढ़ी थी।
सेवाओं में सुधार करें बैंक व एनबीएफसी : गवर्नर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ग्राहकों की बढ़ती शिकायतों के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की आलोचना की थी। उन्होंने इन संस्थानों से अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने और शिकायतों का एक निश्चित समयसीमा के भीतर समाधान करने को कहा था। मल्होत्रा ने यह भी सुझाव दिया था कि एमडी और सीईओ सहित वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे पर कम से कम सप्ताह में एक बार समय दें।आरबीआई की एकीकृत लोकपाल योजना के तहत शिकायतों की संख्या पिछले दो वर्षों में 50 फीसदी सालाना की औसत दर से बढ़ी है। 2023-24 में यह 9.34 लाख तक पहुंच गई।
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