SECL के नए माइंस का विरोध पड़ा भारी, मदननगर में पुलिस-ग्रामीण आमने-सामने
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले मदननगर गांव में एसईसीएल (SECL) के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर तनाव गहरा गया है। सर्वे के लिए पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस दल के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जो हिंसक झड़प में बदल गया। खबरों के मुताबिक, इस नोंकझोंक और टकराव के दौरान कई पुलिसकर्मियों के साथ-साथ एक एसडीओपी (SDOP) रैंक के वरिष्ठ अधिकारी के घायल होने की खबर सामने आई है।
पुलिस बल पर हमला और मची भगदड़
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भारी पुलिस बल की तैनाती: तनावपूर्ण हालात को देखते हुए मौके पर सैकड़ों की संख्या में पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जो स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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भगदड़ और चोटें: अचानक हुए विरोध और हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जान बचाकर भागने और संभलने के दौरान मची भगदड़ में कई पुलिसकर्मी जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जवानों के सिर फटने और गंभीर चोटें आने की भी सूचना मिली है।
अस्पताल में इलाज और इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है। स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रहे हैं।
क्या है पूरे विवाद की असल वजह?
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले एसईसीएल (SECL) की टीम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के सिलसिले में सर्वे करने के लिए इस गांव में पहुंची थी। ग्रामीणों का आरोप है कि खेती-किसानी के इस व्यस्त समय में बिना उनकी सहमति और पर्याप्त जानकारी के जबरन सर्वे कराया जा रहा था, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया। तभी से ग्रामीण धरने पर बैठकर अपना रोष प्रकट कर रहे थे।
फिलहाल सर्वे कार्य स्थगित, बातचीत के आसार
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए फिलहाल मौके पर सर्वे का सारा काम रोक दिया गया है। प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, ग्रामीणों ने अपनी ओर से बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी पूरी सहमति नहीं ली जाती और उन्हें जमीन अधिग्रहण से जुड़ी हर बात की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तब तक वे इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने देंगे।
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