हाई-रिस्क गर्भवतियों के लिए दमोह में मेगा हेल्थ कैंप, मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर फोकस
दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर के आंकड़े एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आए हैं, जो प्रदेश के औसत से कहीं अधिक चिंताजनक हैं। प्रसव के दौरान और उसके बाद गर्भवती महिलाओं की बढ़ती मौतें स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही हैं, जिस पर अब भारत सरकार के नीति आयोग और राज्य सरकार दोनों ने कड़ा संज्ञान लिया है। इन हालात में सुधार लाने और गर्भवती महिलाओं की जान बचाने के लिए दमोह जिले में एक विशेष और व्यापक अभियान की शुरुआत की गई है।
प्रदेश के औसत से कहीं अधिक है दमोह का आंकड़ा
आंकड़ों पर गौर करें तो, जहां पूरे मध्य प्रदेश में प्रति एक हजार डिलीवरी पर औसतन 26 महिलाओं की मृत्यु होती है, वहीं दमोह जिले में यह भयावह आंकड़ा प्रति एक हजार प्रसव पर 32 माताओं की जान तक पहुंच जाता है, जो राष्ट्रीय और प्रादेशिक औसत से काफी ज्यादा है।
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नीति आयोग की सख्त नजर: इन गंभीर और चिंताजनक हालातों को देखते हुए केंद्रीय नीति आयोग ने जिला प्रशासन को तत्काल और प्रभावी सुधारात्मक उपाय करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
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राज्य सरकार ने भी दमोह जिले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए एक बहुआयामी पहल शुरू की है।
वनांचल के मेगा स्वास्थ्य शिविरों में हो रही हाई-रिस्क गर्भवतियों की पहचान
इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल के तहत स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग मिलकर जिले के सुदूर और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर रहे हैं।
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उद्देश्य: इन शिविरों का मुख्य लक्ष्य मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को प्रभावी ढंग से नीचे लाना है।
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शिविरों के दौरान विशेष रूप से उन महिलाओं को चिन्हित किया जा रहा है जो 'हाई-रिस्क' (उच्च जोखिम) श्रेणी में आती हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही, क्षेत्र के कुपोषित बच्चों का भी गहन स्वास्थ्य परीक्षण कर उनके पोषण स्तर को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जीवन रक्षक दवाएं और पोषण आहार उपलब्ध
पहचान की गई सभी हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता, जीवन रक्षक दवाएं और उच्च गुणवत्ता वाला पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। ये शिविर उन माताओं और बच्चों तक सीधे पहुंच रहे हैं, जिन्हें सामान्य दिनों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आसानी से नहीं मिल पाता है।
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सघन निगरानी: स्वास्थ्य विभाग इन चिन्हित महिलाओं की लगातार और सख्त निगरानी कर रहा है ताकि सुरक्षित प्रसव से लेकर डिलीवरी के बाद की देखभाल तक में कोई चूक न हो।
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मड़ियादो में पहला सफल शिविर: इस अभियान के तहत प्रदेश और दमोह जिले का पहला बड़ा मेगा शिविर वनांचल क्षेत्र के मड़ियादो में बेहद सफलता के साथ आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में हाई-रिस्क महिलाओं की पहचान की गई।
'मातृ मृत्यु दर को शून्य पर लाना हमारा मुख्य लक्ष्य' - कलेक्टर
इन शिविरों और स्वास्थ्य अभियानों को लेकर दमोह के कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने विस्तार से जानकारी दी।
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कलेक्टर का बयान: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में मातृ मृत्यु दर का औसत पूरे प्रदेश से अधिक होना बेहद चिंताजनक है, और अब हमारा एकमात्र और मुख्य लक्ष्य इस आंकड़े को घटाकर शून्य (Zero) पर लाना है ताकि कोई भी मां अपने बच्चे को जन्म देते समय अपनी अमूल्य जान न गंवाए।
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कलेक्टर ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के समन्वय से चलाए जा रहे इन अथक प्रयासों के सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आएंगे।
इस पूरी स्वास्थ्य मुहिम को सफल बनाने में डॉ. उमाशंकर पटेल जैसे अनुभवी स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम भी दूरस्थ अंचलों में दिन-रात जुटी हुई है, जिनके कुशल नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं।
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