डिंडौरी: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिला अस्पताल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां इलाज के दौरान एक गंभीर मरीज को डॉक्टर की सलाह के बिना सलाइन (IV ड्रिप) की जगह मिनरल वाटर की बोतल चढ़ाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस अमानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने प्रारंभिक जांच के आधार पर एक नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी समेत तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

चूहामार दवा खाने वाले मरीज की जिंदगी से खिलवाड़

यह पूरा मामला डिंडौरी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का है।

  • घटना की शुरुआत: गत 22 जुलाई 2026 को सिविल लाइन निवासी 18 वर्षीय युवक सत्यम यादव ने गलती से या किसी कारणवश चूहे मारने की दवा खा ली थी, जिसके बाद उसकी हालत गंभीर होने पर परिजनों ने उसे तुरंत डिंडौरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

  • गंभीर लापरवाही: अस्पताल में इलाज के दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा स्टॉफ ने सभी चिकित्सकीय प्रोटोकॉल को ताक पर रख दिया। मरीज को सामान्य सलाइन चढ़ाने के बजाय ड्रिप स्टैंड पर बाजार से लाई गई पैक्ड मिनरल वाटर की बोतल लटकाकर उसका पेट साफ (गैस्ट्रिक वॉश) करने का प्रयास किया गया।

इस गंभीर लापरवाही से मरीज के जीवन को सीधा और बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया था। इस पूरी घटना का किसी ने चुपचाप वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया।

नर्सिंग ऑफिसर निलंबित, तीन बड़े अधिकारियों को नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने त्वरित एक्शन लिया है।

  • नर्सिंग ऑफिसर पर गाज: इस अमानवीय लापरवाही के लिए ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर भावना चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जिनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, डिंडौरी निर्धारित किया गया है।

  • इन अधिकारियों को नोटिस: इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज कुमार पांडेय, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. रमेश मरावी और संबंधित मेडिकल ऑफिसर डॉ. भरत कुमार संत को कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को 3 अगस्त 2026 तक अपना स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस तरह की लापरवाही ने एक बार फिर डिंडौरी सहित पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, चिकित्सा प्रोटोकॉल के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन इस घटना ने आम जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अस्पतालों में बैठे जिम्मेदार लोग मरीजों की जिंदगी के साथ कितनी लापरवाही बरत रहे हैं।