भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए 'भगवान श्रीकृष्ण छात्रवृत्ति योजना' का शुभारंभ करने जा रही है। इस नई और अनूठी छात्रवृत्ति योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक प्रतिभा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कौशल और हुनर को प्रोत्साहित करना है।

64 कलाओं और 64 विद्याओं के आधार पर होगा मूल्यांकन

इस योजना के तहत विद्यार्थियों का मूल्यांकन भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध 64 कलाओं और 64 विद्याओं से जुड़े हुनर के आधार पर किया जाएगा। इन प्राचीन विधाओं और कलाओं में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार स्वरूप भारी-भरकम छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

1102 मेधावी विद्यार्थियों का किया जाएगा चयन

  • जिम्मेदारी: इस महत्वाकांक्षी योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी 'श्रीकृष्ण पाथेय न्यास' को सौंपी गई है, जो इसके लिए पात्रता, चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन के कड़े मानदंड तय करेगा।

  • चयनित छात्र: योजना के अंतर्गत प्रदेशभर से कुल 1102 मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। इनमें से 51 छात्र स्कूली स्तर से तथा 51 छात्र कॉलेज और विश्वविद्यालयों से चुने जाएंगे (योजना के तहत कुल चयनित मेधावी छात्रों को यह प्रतिष्ठित लाभ मिलेगा)।

  • पुरस्कार राशि: चयनित होने वाले प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को 1 लाख रुपये की नकद छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

सरकार का यह कदम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के समग्र (होस्टिक) विकास को बढ़ावा देने, उन्हें हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों से जोड़ने तथा उनकी छिपी प्रतिभा को एक नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

29 जुलाई को मनाया जाएगा महर्षि सांदीपनि ‘गुरु पर्व’

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आगामी 29 जुलाई को मध्य प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, पॉलिटेक्निक व आईटीआई संस्थानों में महर्षि सांदीपनि ‘गुरु पर्व’ बेहद धूमधाम के साथ आयोजित किया जाएगा।

  • इस विशेष अवसर पर महर्षि सांदीपनि के जीवन दर्शन पर आधारित ई-एल्बम और बुकलेट प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को उपलब्ध कराई जाएगी।

  • इसके साथ ही सरकार, आम नागरिकों और पूर्व विद्यार्थियों को यह प्रेरित किया जाएगा कि वे अपने शैक्षणिक व आध्यात्मिक गुरुओं की स्मृति में शिक्षण संस्थानों में विशेष पदक, पुरस्कार और छात्रवृत्तियां शुरू करने में आगे आएं।