स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन: भारतीय नौसेना में जल्द शामिल
नई दिल्ली। भारत अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट के जरिए भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी, आईएनएस अरिदमन के जल्द ही नौसेना में शामिल होने का संकेत दिया है। उन्होंने लिखा- यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, इसका मतलब है शक्ति-अरिदमन!
जानकारी के मुताबिक लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से लैस, अरिदमन से भारत की समुद्री-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह देश के परमाणु सिद्धांत के अनुरूप, इसकी मारक क्षमता और जीवित रहने की क्षमता-दोनों को बढ़ाएगी। यह घोषणा उनके विशाखापत्तनम दौरे के साथ हुई, जहां वे आज स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी को नौसेना में शामिल करने वाले हैं। विशाखापत्तनम जो भारत की परमाणु पनडुब्बियों का घर है, उनके निर्माण केंद्र और वर्तमान होम पोर्ट- दोनों के रूप में कार्य करता है।
आईएनएस अरिदमन ने अपने समुद्री परीक्षणों का अंतिम चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब यह स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल होने के लिए तैयार है। यह अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात के नक्शेकदम पर चलेगी। करीब 7,000 टन विस्थापन वाली अरिदमन, अपनी श्रेणी की पिछली पनडुब्बियों की तुलना में थोड़ी बड़ी है। इसमें बेहतर स्टील्थ और ध्वनिक प्रदर्शन के लिए अधिक सुव्यवस्थित ढांचा है। यह पनडुब्बी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित एक उन्नत 83 एमडब्ल्यु प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर द्वारा संचालित है।
रिपोर्ट के मुताबिक अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों के विपरीत, अरिदमन आठ ऊर्ध्वाधर लॉन्च ट्यूबों से लैस है जो आईएनएस अरिहंत की क्षमता से दोगुनी है। यह इसे 3,500 किमी की मारक क्षमता वाली आठ के-4 लंबी दूरी की मिसाइलें, या 750 किमी की मारक क्षमता वाली 24 के-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम बनाती है। इसके शामिल होने से भारत समुद्र में निरंतर प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में सक्षम होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर समय कम से कम एक परमाणु-हथियारों से लैस पनडुब्बी गश्त पर रहे।
पिछले साल की शुरुआत में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी कहा था कि आईएनएस अरिदमन को अप्रैल और मई के बीच नौसेना में शामिल किया जाएगा। दिसंबर 2025 में वार्षिक प्री-नेवी डे कार्यक्रम में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने पुष्टि की थी कि यह उन्नत पनडुब्बी अब अपने परीक्षणों के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है।
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